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mahabharat 3.82.117: हे कुरुनन्दन! वहाँ से कुमारकोटि तीर्थ में जाकर वहाँ नित्य स्नान करो और देवताओं तथा पितरों की पूजा में तत्पर रहो॥117॥   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 117
 
 
श्लोक  3.82.117 
कुमारकोटिमासाद्य नियत: कुरुनन्दन।
तत्राभिषेकं कुर्वीत पितृदेवार्चने रत:॥ ११७॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुनन्दन! वहाँ से कुमारकोटि तीर्थ में जाकर वहाँ नित्य स्नान करो और देवताओं तथा पितरों की पूजा में तत्पर रहो॥117॥
 
Kurunandan! From there, go to Kumarakoti Teerth and take bath there regularly and be ready to worship the gods and ancestors. 117॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)