Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.82.114-116: राजेन्द्र! शशयन नामक तीर्थ अत्यंत दुर्लभ है। वहाँ जाकर स्नान करो। महाराज भरत! वहाँ प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा को सरस्वती नदी में खरगोश के रूप में छिपे हुए पुष्कर तीर्थ के दर्शन होते हैं। भरतश्रेष्ठ! व्याघ्रपुरुष! जो मनुष्य वहाँ स्नान करता है, वह सदैव चंद्रमा के समान चमकता है। भरतकुलतिलक! उसे एक हजार गौओं के दान का भी फल मिलता है। 114-116। | mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजेन्द्र! शशयन नामक तीर्थ अत्यंत दुर्लभ है। वहाँ जाकर स्नान करो। महाराज भरत! वहाँ प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा को सरस्वती नदी में खरगोश के रूप में छिपे हुए पुष्कर तीर्थ के दर्शन होते हैं। भरतश्रेष्ठ! व्याघ्रपुरुष! जो मनुष्य वहाँ स्नान करता है, वह सदैव चंद्रमा के समान चमकता है। भरतकुलतिलक! उसे एक हजार गौओं के दान का भी फल मिलता है। 114-116।
Rajendra! The pilgrimage called Shashayan is very rare. Go there and take a bath. Maharaja Bharat! There, every year on the Kartik Poornima, the Pushkar Tirtha is seen hidden in the form of a rabbit in the Saraswati river. Best of Bharat! Tiger-man! A man who takes a bath there always shines like the moon. Bharatkultilak! He also gets the reward of donating a thousand cows. 114-116.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥