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mahabharat 3.82.113: शिवोद्भेद में स्नान करने से मनुष्य को हजार गोदान का फल मिलता है। नागोद्भेदतीर्थ में स्नान करने से नागलोक की प्राप्ति होती है ॥113॥   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  3.82.113 
शिवोद्भेदे नर: स्नात्वा गोसहस्रफलं लभेत्।
नागोद्भेदे नर: स्नात्वा नागलोकमवाप्नुयात्॥ ११३॥
 
 
अनुवाद
शिवोद्भेद में स्नान करने से मनुष्य को हजार गोदान का फल मिलता है। नागोद्भेदतीर्थ में स्नान करने से नागलोक की प्राप्ति होती है ॥113॥
 
By taking bath in Shivodbheda, a person gets the fruit of thousand Godan. By taking bath in Nagodbhedtirtha one attains Nagalok. 113॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)