Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.82.11: जो मनुष्य अहंकार आदि विकारों से रहित है, कर्म के अहंकार से रहित है, अल्पाहार करता है और समस्त इन्द्रियों से मुक्त है, वही तीर्थ का वास्तविक फल प्राप्त करता है और समस्त पापों से मुक्त हो जाता है ॥11॥ | mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अकल्कको निरारम्भो लघ्वाहारो जितेन्द्रिय:।
विमुक्त: सर्वपापेभ्य: स तीर्थफलमश्नुते॥ ११॥
अनुवाद
जो मनुष्य अहंकार आदि विकारों से रहित है, कर्म के अहंकार से रहित है, अल्पाहार करता है और समस्त इन्द्रियों से मुक्त है, वही तीर्थ का वास्तविक फल प्राप्त करता है और समस्त पापों से मुक्त हो जाता है ॥11॥
One who is free from vices like pride, free from ego of doing, has little food and is free from all the senses, he is the one who gets the real fruits of pilgrimage and is free from all sins. 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥