श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 107
 
 
श्लोक  3.82.107 
अर्धयोजनविस्तारा पञ्चयोजनमायता।
एतावती वेदिका तु पुण्या देवर्षिसेविता॥ १०७॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पाँच योजन लम्बी और आधा योजन चौड़ी एक पवित्र वेदी है, जिसका उपयोग देवता और ऋषि भी करते हैं ॥107॥
 
There is a sacred altar five yojanas long and half a yojana wide, which is used by the gods and sages as well.॥ 107॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)