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mahabharat 3.82.105: वहाँ देवताओं द्वारा पूजित भगवान शंकर का कामतीर्थ है। हे भारत! वहाँ स्नान करने से मनुष्य शीघ्र ही अपनी इच्छित सिद्धि प्राप्त कर लेता है। (105)   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  3.82.105 
कामाख्यं तत्र रुद्रस्य तीर्थं देवनिषेवितम्।
तत्र स्नात्वा नर: क्षिप्रं सिद्धिं प्राप्नोति भारत॥ १०५॥
 
 
अनुवाद
वहाँ देवताओं द्वारा पूजित भगवान शंकर का कामतीर्थ है। हे भारत! वहाँ स्नान करने से मनुष्य शीघ्र ही अपनी इच्छित सिद्धि प्राप्त कर लेता है। (105)
 
There is the Kamatirtha of Lord Shankar, worshipped by the gods. O Bharat! By taking a bath there, a man quickly achieves his desired success. 105.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)