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mahabharat 3.82.1: पुलस्त्य बोले, 'हे ज्ञानी! हे श्रेष्ठ व्रतों का पालन करने वाले सौभाग्यशाली! मैं तुम्हारी विनम्रता, संयम और सत्य के पालन से बहुत प्रसन्न हूँ।'   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.82.1 
पुलस्त्य उवाच
अनेन तव धर्मज्ञ प्रश्रयेण दमेन च।
सत्येन च महाभाग तुष्टोऽस्मि तव सुव्रत॥ १॥
 
 
अनुवाद
पुलस्त्य बोले, 'हे ज्ञानी! हे श्रेष्ठ व्रतों का पालन करने वाले सौभाग्यशाली! मैं तुम्हारी विनम्रता, संयम और सत्य के पालन से बहुत प्रसन्न हूँ।'
 
Pulastya said, 'O knowledgeable one! O fortunate one who observes the best vows! I am very pleased with your humility, self-control and observance of truth.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)