श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 81: युधिष्ठिरके पास देवर्षि नारदका आगमन और तीर्थयात्राके फलके सम्बन्धमें पूछनेपर नारदजीद्वारा भीष्म-पुलस्त्य-संवादकी प्रस्तावना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.81.8 
अथ धर्मसुतो राजा प्रणम्य भ्रातृभि: सह।
उवाच प्राञ्जलिर्भूत्वा नारदं देवसम्मितम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
तब राजा युधिष्ठिर ने अपने भाइयों सहित देवतुल्य नारदजी को प्रणाम किया और हाथ जोड़कर कहा-॥8॥
 
Then King Yudhishthira, along with his brothers, bowed to the god-like Narada and said with folded hands -॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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