vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 81: युधिष्ठिरके पास देवर्षि नारदका आगमन और तीर्थयात्राके फलके सम्बन्धमें पूछनेपर नारदजीद्वारा भीष्म-पुलस्त्य-संवादकी प्रस्तावना
»
श्लोक 4
श्लोक
3.81.4
स तै: परिवृत: श्रीमान् भ्रातृभि: कुरुसत्तम:।
विबभावतिदीप्तौजा देवैरिव शतक्रतु:॥ ४॥
अनुवाद
अपने भाइयों से घिरे हुए परम तेजस्वी कौरव युधिष्ठिर देवताओं से घिरे हुए इन्द्र के समान शोभा पा रहे थे॥4॥
Yudhishthira, the most brilliant Kurus, surrounded by his brothers, was looking as beautiful as Lord Indra surrounded by the gods. 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×