श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 81: युधिष्ठिरके पास देवर्षि नारदका आगमन और तीर्थयात्राके फलके सम्बन्धमें पूछनेपर नारदजीद्वारा भीष्म-पुलस्त्य-संवादकी प्रस्तावना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.81.21 
एवमुक्त्वा महाराज भीष्मो धर्मभृतां वर:।
वाग्यत: प्राञ्जलिर्भूत्वा तूष्णीमासीद् युधिष्ठिर॥ २१॥
 
 
अनुवाद
महाराज युधिष्ठिर! ऐसा कहकर धनुर्धरों में श्रेष्ठ और वाणी को वश में रखने वाले भीष्म हाथ जोड़कर चुप हो गए॥21॥
 
Maharaja Yudhishthira! Having said this, Bhishma, the best among archers and one who had control over his speech, folded his hands and became silent. ॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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