श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 81: युधिष्ठिरके पास देवर्षि नारदका आगमन और तीर्थयात्राके फलके सम्बन्धमें पूछनेपर नारदजीद्वारा भीष्म-पुलस्त्य-संवादकी प्रस्तावना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.81.15 
स पितॄंस्तर्पयामास देवांश्च परमद्युति:।
ऋषींश्च तर्पयामास विधिदृष्टेन कर्मणा॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वहाँ परम तेजस्वी भीष्म ने देवताओं, ऋषियों और पितरों का शास्त्रानुसार तर्पण किया ॥15॥
 
There the extremely illustrious Bhishma performed the oblations to the gods, sages and forefathers in accordance with the scriptures. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)