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mahabharat 3.81.12: नारदजी बोले- राजन! ध्यानपूर्वक सुनो, मैं तुमसे कहता हूँ कि बुद्धिमान भीष्मजी ने महर्षि पुलस्त्य के मुख से ये सब बातें किस प्रकार सुनी थीं॥12॥   |   mahabharat अध्याय 3.81: युधिष्ठिरके पास देवर्षि नारदका आगमन और तीर्थयात्राके फलके सम्बन्धमें पूछनेपर नारदजीद्वारा भीष्म-पुलस्त्य-संवादकी प्रस्तावना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 81: युधिष्ठिरके पास देवर्षि नारदका आगमन और तीर्थयात्राके फलके सम्बन्धमें पूछनेपर नारदजीद्वारा भीष्म-पुलस्त्य-संवादकी प्रस्तावना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.81.12 
नारद उवाच
शृणु राजन्नवहितो यथा भीष्मेण धीमता।
पुलस्त्यस्य सकाशाद् वै सर्वमेतदुपश्रुतम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
नारदजी बोले- राजन! ध्यानपूर्वक सुनो, मैं तुमसे कहता हूँ कि बुद्धिमान भीष्मजी ने महर्षि पुलस्त्य के मुख से ये सब बातें किस प्रकार सुनी थीं॥12॥
 
Naradji said- Rajan! Listen carefully, I am telling you how the wise Bhishmaji had heard all these things from the mouth of Maharishi Pulastya. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)