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mahabharat 3.81.11: 'जो मनुष्य तीर्थयात्रा में तत्पर रहता है और पृथ्वी की परिक्रमा करता है, उसे क्या फल मिलता है? कृपया मुझे विस्तारपूर्वक बताइए।'॥11॥   |   mahabharat अध्याय 3.81: युधिष्ठिरके पास देवर्षि नारदका आगमन और तीर्थयात्राके फलके सम्बन्धमें पूछनेपर नारदजीद्वारा भीष्म-पुलस्त्य-संवादकी प्रस्तावना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 81: युधिष्ठिरके पास देवर्षि नारदका आगमन और तीर्थयात्राके फलके सम्बन्धमें पूछनेपर नारदजीद्वारा भीष्म-पुलस्त्य-संवादकी प्रस्तावना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.81.11 
प्रदक्षिणां य: कुरुते पृथिवीं तीर्थतत्पर:।
किं फलं तस्य कात्‍स्‍न्‍‍‍र्ये न तद्भवान् वक्तुमर्हति॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'जो मनुष्य तीर्थयात्रा में तत्पर रहता है और पृथ्वी की परिक्रमा करता है, उसे क्या फल मिलता है? कृपया मुझे विस्तारपूर्वक बताइए।'॥11॥
 
'What benefits does a person get who is devoted to pilgrimage and circumambulates this earth? Please tell me this in detail.'॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)