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mahabharat 3.80.6: बिना किसी प्रयास के महान् कर्म करने वाले अर्जुन के बिना वह वन कुबेर के बिना चैत्ररथ वन के समान शोभाहीन हो गया॥6॥   |   mahabharat अध्याय 3.80: अर्जुनके लिये द्रौपदीसहित पाण्डवोंकी चिन्ता   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.80.6 
वनं तु तदभूत् तेन हीनमक्लिष्टकर्मणा।
कुबेरेण यथा हीनं वनं चैत्ररथं तथा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
बिना किसी प्रयास के महान् कर्म करने वाले अर्जुन के बिना वह वन कुबेर के बिना चैत्ररथ वन के समान शोभाहीन हो गया॥6॥
 
Without Arjun, who performed great deeds without any effort, that forest became as beautyless as Chaitrarath forest without Kubera. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)