श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनके लिये द्रौपदीसहित पाण्डवोंकी चिन्ता  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.80.4 
वैशम्पायन उवाच
गते तु पाण्डवे तात काम्यकात् सत्यविक्रमे।
बभूवु: पाण्डवेयास्ते दु:खशोकपरायणा:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- तात! महाबली पाण्डुकुमार अर्जुन के काम्यकवन से चले जाने पर समस्त पाण्डव उनके लिए शोक और शोक में लीन हो गए॥4॥
 
Vaishampayanji says- Tat! After the departure of the mighty Pandukumar Arjuna from Kamyakavan, all the Pandavas became engrossed in sorrow and grief for him. 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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