श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनके लिये द्रौपदीसहित पाण्डवोंकी चिन्ता  »  श्लोक 27-28
 
 
श्लोक  3.80.27-28 
सहदेव उवाच
यो धनानि च कन्याश्च युधि जित्वा महारथ:।
आजहार पुरा राज्ञे राजसूये महाक्रतौ॥ २७॥
य: समेतान् मृधे जित्वा यादवानमितद्युति:।
सुभद्रामाजहारैको वासुदेवस्य सम्मते॥ २८॥
 
 
अनुवाद
सहदेव बोले - वह महायोद्धा जिसने पहले राजसूय महायज्ञ के अवसर पर युद्ध में विजय प्राप्त करने के पश्चात राजा युधिष्ठिर को बहुत-सा धन और कन्याएँ भेंट की थीं, वही महातेजस्वी धनंजय जिसने भगवान श्रीकृष्ण की सलाह से अकेले ही युद्ध के लिए एकत्रित हुए समस्त यादवों को परास्त कर दिया और सुभद्रा का हरण कर लिया।
 
Sahadeva said - that great warrior who had earlier on the occasion of the Rajasuya great sacrifice presented a lot of wealth and daughters to King Yudhishthira after winning the war, that infinitely illustrious Dhananjaya who with the advice of Lord Krishna single-handedly defeated all the Yadavas who had gathered for the war and abducted Subhadra.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd