श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनके लिये द्रौपदीसहित पाण्डवोंकी चिन्ता  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.80.23 
नकुल उवाच
यस्मिन् दिव्यानि कर्माणि कथयन्ति रणाजिरे।
देवा अपि युधां श्रेष्ठं तमृते का रतिर्वने॥ २३॥
 
 
अनुवाद
नकुल बोले - हे महावीर अर्जुन, जिनके दिव्य कर्मों का वर्णन युद्धस्थल में देवता भी करते हैं, योद्धाओं में श्रेष्ठ धनंजय के बिना इस वन में हमें क्या सुख है? 23॥
 
Nakula said - Mahavir Arjuna, about whom divine deeds are described even by the gods in the battlefield, what happiness do we have in this forest without Dhananjaya, the best among warriors? 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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