श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनके लिये द्रौपदीसहित पाण्डवोंकी चिन्ता  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.80.22 
ततोऽब्रवीत् साश्रुकण्ठो नकुल: पाण्डुनन्दन:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन के ये वचन सुनकर पाण्डवपुत्र नकुल ने रुंधे हुए गले से कहा-॥22॥
 
On hearing these words of Bhimasena, Pandava son Nakul spoke with a tearful throat -॥22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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