श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनके लिये द्रौपदीसहित पाण्डवोंकी चिन्ता  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.80.17 
भीम उवाच
मन:प्रीतिकरं भद्रे यद् ब्रवीषि सुमध्यमे।
तन्मे प्रीणाति हृदयममृतप्राशनोपमम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन बोले - हे प्रिये! आप जो कुछ कहते हैं, वह मेरे मन को भाता है। आपके वचन मेरे हृदय को अमृतपान के समान तृप्त करते हैं।
 
Bhimsena said - O dear! Whatever you say pleases my mind. Your words satisfy my heart like drinking nectar.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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