श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनके लिये द्रौपदीसहित पाण्डवोंकी चिन्ता  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.80.1 
जनमेजय उवाच
भगवन् काम्यकात् पार्थे गते मे प्रपितामहे।
पाण्डवा: किमकुर्वंस्ते तमृते सव्यसाचिनम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा - प्रभु ! जब मेरे परदादा अर्जुन काम्यकवन से चले गए, तब उनसे दूर रहकर शेष पाण्डवों ने क्या कार्य किया ? 1॥
 
Janamejaya asked – Lord! When my great grandfather Arjuna left from Kamyakavan, what work did the remaining Pandavas do while staying away from him? 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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