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mahabharat 3.8.4: यह जानते हुए भी आपका पापी और मूर्ख पुत्र क्यों सदैव क्रोध में भरा रहता है और राज्य के लिए पाण्डवों को मारना चाहता है?॥4॥   |   mahabharat अध्याय 3.8: व्यासजीका धृतराष्ट्रसे दुर्योधनके अन्यायको रोकनेके लिये अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 8: व्यासजीका धृतराष्ट्रसे दुर्योधनके अन्यायको रोकनेके लिये अनुरोध  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.8.4 
तदयं किं नु पापात्मा तव पुत्र: सुमन्दधी:।
पाण्डवान्नित्यसंक्रुद्धो राज्यहेतोर्जिघांसति॥ ४॥
 
 
अनुवाद
यह जानते हुए भी आपका पापी और मूर्ख पुत्र क्यों सदैव क्रोध में भरा रहता है और राज्य के लिए पाण्डवों को मारना चाहता है?॥4॥
 
Despite knowing this, why does your sinful and foolish son always remain filled with anger and want to kill the Pandavas for the kingdom? ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)