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mahabharat 3.8.3: भरत! तेरहवें वर्ष के पूर्ण होने पर वह कौरवों को दिए गए कष्टों को स्मरण करके क्रोधित होकर उन पर विष उगलेगा, अर्थात् विष के समान घातक अस्त्रों से उन पर आक्रमण करेगा॥3॥   |   mahabharat अध्याय 3.8: व्यासजीका धृतराष्ट्रसे दुर्योधनके अन्यायको रोकनेके लिये अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 8: व्यासजीका धृतराष्ट्रसे दुर्योधनके अन्यायको रोकनेके लिये अनुरोध  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  3.8.3 
ते स्मरन्त: परिक्लेशान् वर्षे पूर्णे त्रयोदशे।
विमोक्ष्यन्ति विषं क्रुद्धा: कौरवेयेषु भारत॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भरत! तेरहवें वर्ष के पूर्ण होने पर वह कौरवों को दिए गए कष्टों को स्मरण करके क्रोधित होकर उन पर विष उगलेगा, अर्थात् विष के समान घातक अस्त्रों से उन पर आक्रमण करेगा॥3॥
 
Bhaarat! On completion of his thirteenth year, remembering the sufferings he had inflicted on them, he will become enraged and spit venom on the Kauravas, that is, he will attack them with weapons as deadly as poison.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)