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mahabharat 3.8.10: मनुजेश्वर! वहाँ पाण्डवों के साथ रहने से यदि वे आपके पुत्र पर स्नेह करने लगें, तो आज ही आपकी इच्छा पूरी हो जाएगी॥10॥   |   mahabharat अध्याय 3.8: व्यासजीका धृतराष्ट्रसे दुर्योधनके अन्यायको रोकनेके लिये अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 8: व्यासजीका धृतराष्ट्रसे दुर्योधनके अन्यायको रोकनेके लिये अनुरोध  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.8.10 
तत: संसर्गज: स्नेह: पुत्रस्य तव पाण्डवै:।
यदि स्यात् कृतकार्योऽद्य भवेस्त्वं मनुजेश्वर॥ १०॥
 
 
अनुवाद
मनुजेश्वर! वहाँ पाण्डवों के साथ रहने से यदि वे आपके पुत्र पर स्नेह करने लगें, तो आज ही आपकी इच्छा पूरी हो जाएगी॥10॥
 
Manujeshwar! By being in the company of the Pandavas there, if they develop affection for your son, then you will be fulfilled today itself. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)