श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 8: व्यासजीका धृतराष्ट्रसे दुर्योधनके अन्यायको रोकनेके लिये अनुरोध  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.8.1 
व्यास उवाच
धृतराष्ट्र महाप्राज्ञ निबोध वचनं मम।
वक्ष्यामि त्वां कौरवाणां सर्वेषां हितमुत्तमम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
व्यास बोले, "हे बुद्धिमान धृतराष्ट्र! मेरी बात सुनो। मैं तुम्हें एक अच्छी बात बताऊंगा, जो समस्त कौरवों के लिए हितकर होगी।"
 
Vyasa said, "O wise Dhritarashtra! Listen to me. I will tell you a good thing that will be beneficial for all the Kauravas."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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