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mahabharat 3.79.d2: उन्होंने अपने सभी भाइयों को एक साथ बैठे देखा और जब उन्होंने अर्जुन को वहां नहीं देखा, तो उनकी आंखों में आंसू भर आए और वे बहुत व्यथित स्वर में भीमसेन से बोले।   |   mahabharat अध्याय 3.79: राजा नलके आख्यानके कीर्तनका महत्त्व, बृहदश्व मुनिका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा द्यूतविद्या और अश्वविद्याका रहस्य बताकर जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 79: राजा नलके आख्यानके कीर्तनका महत्त्व, बृहदश्व मुनिका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा द्यूतविद्या और अश्वविद्याका रहस्य बताकर जाना  »  श्लोक d2
 
 
श्लोक  3.79.d2 
स्वभ्रातॄन् सहितान् पश्यन् कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिर:।
अपश्यन्नर्जुनं तत्र बभूवाश्रुपरिप्लुत:।
संतप्यमान: कौन्तेयो भीमसेनमुवाच ह॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने अपने सभी भाइयों को एक साथ बैठे देखा और जब उन्होंने अर्जुन को वहां नहीं देखा, तो उनकी आंखों में आंसू भर आए और वे बहुत व्यथित स्वर में भीमसेन से बोले।
 
He looked at all his brothers sitting together and when he did not see Arjuna there, his eyes filled with tears and he spoke to Bhimasena in a very distressed tone.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)