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mahabharat 3.79.8: पाण्डुनन्दन! आप अपने समस्त भाइयों तथा रानी द्रौपदी के साथ इस महान् वन में भ्रमण करते हैं और निरन्तर धर्म के चिंतन में लगे रहते हैं। 8॥   |   mahabharat अध्याय 3.79: राजा नलके आख्यानके कीर्तनका महत्त्व, बृहदश्व मुनिका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा द्यूतविद्या और अश्वविद्याका रहस्य बताकर जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 79: राजा नलके आख्यानके कीर्तनका महत्त्व, बृहदश्व मुनिका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा द्यूतविद्या और अश्वविद्याका रहस्य बताकर जाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.79.8 
त्वं पुनर्भ्रातृसहित: कृष्णया चैव पाण्डव।
रमसेऽस्मिन् महारण्ये धर्ममेवानुचिन्तयन्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुनन्दन! आप अपने समस्त भाइयों तथा रानी द्रौपदी के साथ इस महान् वन में भ्रमण करते हैं और निरन्तर धर्म के चिंतन में लगे रहते हैं। 8॥
 
Pandunandan! You travel in this great forest with all your brothers and Queen Draupadi and are constantly engaged in the contemplation of religion. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)