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mahabharat 3.79.26: राजन! उस महान वन में अपने प्रिय भाई अर्जुन को तपस्या करते हुए सुनकर पाण्डुनन्दन युधिष्ठिर बार-बार उनके लिए विलाप करने लगे॥26॥   |   mahabharat अध्याय 3.79: राजा नलके आख्यानके कीर्तनका महत्त्व, बृहदश्व मुनिका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा द्यूतविद्या और अश्वविद्याका रहस्य बताकर जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 79: राजा नलके आख्यानके कीर्तनका महत्त्व, बृहदश्व मुनिका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा द्यूतविद्या और अश्वविद्याका रहस्य बताकर जाना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.79.26 
तं श्रुत्वा पाण्डवो राजंस्तप्यमानं महावने।
अन्वशोचत कौन्तेय: प्रियं वै भ्रातरं जयम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
राजन! उस महान वन में अपने प्रिय भाई अर्जुन को तपस्या करते हुए सुनकर पाण्डुनन्दन युधिष्ठिर बार-बार उनके लिए विलाप करने लगे॥26॥
 
Rajan! Hearing his beloved brother Arjun doing penance in that great forest, Pandunandan Yudhishthir started mourning for him again and again. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)