वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय ! तत्पश्चात राजा युधिष्ठिर ने प्रसन्न होकर बृहदश्व से कहा - 'प्रभो ! मैं ज्योतिष का रहस्य यथार्थ रूप में जानना चाहता हूँ ॥20॥
Vaishampayanji says – Janamejaya! Thereafter, King Yudhishthir became happy and said to Brihadashva - 'Lord! I want to know the secret of astrology in reality. 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥