Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.79.20: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय ! तत्पश्चात राजा युधिष्ठिर ने प्रसन्न होकर बृहदश्व से कहा - 'प्रभो ! मैं ज्योतिष का रहस्य यथार्थ रूप में जानना चाहता हूँ ॥20॥   |   mahabharat अध्याय 3.79: राजा नलके आख्यानके कीर्तनका महत्त्व, बृहदश्व मुनिका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा द्यूतविद्या और अश्वविद्याका रहस्य बताकर जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 79: राजा नलके आख्यानके कीर्तनका महत्त्व, बृहदश्व मुनिका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा द्यूतविद्या और अश्वविद्याका रहस्य बताकर जाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.79.20 
वैशम्पायन उवाच
ततो हृष्टमना राजा बृहदश्वमुवाच ह।
भगवन्नक्षहृदयं ज्ञातुमिच्छामि तत्त्वत:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय ! तत्पश्चात राजा युधिष्ठिर ने प्रसन्न होकर बृहदश्व से कहा - 'प्रभो ! मैं ज्योतिष का रहस्य यथार्थ रूप में जानना चाहता हूँ ॥20॥
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! Thereafter, King Yudhishthir became happy and said to Brihadashva - 'Lord! I want to know the secret of astrology in reality. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)