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mahabharat 3.79.2: दमयन्ती के पिता, महापराक्रमी भीम, अपार आत्मबल से संपन्न थे और शत्रु योद्धाओं का संहार करने में समर्थ थे। उन्होंने अपनी पुत्री दमयन्ती को बड़े आदर के साथ विदा किया।   |   mahabharat अध्याय 3.79: राजा नलके आख्यानके कीर्तनका महत्त्व, बृहदश्व मुनिका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा द्यूतविद्या और अश्वविद्याका रहस्य बताकर जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 79: राजा नलके आख्यानके कीर्तनका महत्त्व, बृहदश्व मुनिका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा द्यूतविद्या और अश्वविद्याका रहस्य बताकर जाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.79.2 
दमयन्तीमपि पिता सत्कृत्य परवीरहा।
प्रास्थापयदमेयात्मा भीमो भीमपराक्रम:॥ २॥
 
 
अनुवाद
दमयन्ती के पिता, महापराक्रमी भीम, अपार आत्मबल से संपन्न थे और शत्रु योद्धाओं का संहार करने में समर्थ थे। उन्होंने अपनी पुत्री दमयन्ती को बड़े आदर के साथ विदा किया।
 
Damayanti's father, the fiercely valiant Bhima, was blessed with immeasurable self-power and was capable of killing the warriors of the enemy. He bid farewell to his daughter Damayanti with great respect. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)