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mahabharat 3.79.19: हे सच्चे शूरवीर कुन्तीपुत्र! मैं द्यूतक्रीड़ा का सम्पूर्ण रहस्य जानता हूँ। तुम उसे स्वीकार करो। मैं प्रसन्नतापूर्वक तुम्हें बता रहा हूँ॥19॥   |   mahabharat अध्याय 3.79: राजा नलके आख्यानके कीर्तनका महत्त्व, बृहदश्व मुनिका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा द्यूतविद्या और अश्वविद्याका रहस्य बताकर जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 79: राजा नलके आख्यानके कीर्तनका महत्त्व, बृहदश्व मुनिका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा द्यूतविद्या और अश्वविद्याका रहस्य बताकर जाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.79.19 
वेदाक्षहृदयं कृत्स्नमहं सत्यपराक्रम।
उपपद्यस्व कौन्तेय प्रसन्नोऽहं ब्रवीमि ते॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे सच्चे शूरवीर कुन्तीपुत्र! मैं द्यूतक्रीड़ा का सम्पूर्ण रहस्य जानता हूँ। तुम उसे स्वीकार करो। मैं प्रसन्नतापूर्वक तुम्हें बता रहा हूँ॥19॥
 
O son of Kunti, who is of true bravery! I know the whole secret of the art of gambling. You should accept it. I am happily telling you.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)