श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 79: राजा नलके आख्यानके कीर्तनका महत्त्व, बृहदश्व मुनिका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा द्यूतविद्या और अश्वविद्याका रहस्य बताकर जाना  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  3.79.16-17 
इतिहासमिमं श्रुत्वा पुराणं शश्वदुत्तमम्॥ १६॥
पुत्रान् पौत्रान् पशूंश्चापि लभते नृषु चाग्रॺताम्।
आरोग्यप्रीतिमांश्चैव भविष्यति न संशय:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
इस प्राचीन एवं महान इतिहास को सदैव सुनने से मनुष्य अपने पुत्रों, पौत्रों, पशुओं और मनुष्यों पर श्रेष्ठता प्राप्त करता है। इसमें संदेह नहीं कि वह स्वस्थ और सुखी भी हो जाता है ॥16-17॥
 
By always listening to this ancient and great history, a man attains superiority over his sons, grandsons, animals and humans. There is no doubt that he also becomes healthy and happy. ॥16-17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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