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mahabharat 3.79.14: जब भाग्य प्रतिकूल हो और प्रयत्न असफल हो जाएँ, तब भी जो सत्त्वगुण की शरण लेते हैं, वे अपने मन में विषाद नहीं आने देते।॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.79: राजा नलके आख्यानके कीर्तनका महत्त्व, बृहदश्व मुनिका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा द्यूतविद्या और अश्वविद्याका रहस्य बताकर जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 79: राजा नलके आख्यानके कीर्तनका महत्त्व, बृहदश्व मुनिका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा द्यूतविद्या और अश्वविद्याका रहस्य बताकर जाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.79.14 
विषमावस्थिते दैवे पौरुषेऽफलतां गते।
विषादयन्ति नात्मानं सत्त्वोपाश्रयिणो नरा:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जब भाग्य प्रतिकूल हो और प्रयत्न असफल हो जाएँ, तब भी जो सत्त्वगुण की शरण लेते हैं, वे अपने मन में विषाद नहीं आने देते।॥14॥
 
When destiny is unfavourable and efforts fail, even then those who take refuge in the Sattva Guna do not let gloom enter their minds.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)