श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 79: राजा नलके आख्यानके कीर्तनका महत्त्व, बृहदश्व मुनिका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा द्यूतविद्या और अश्वविद्याका रहस्य बताकर जाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.79.13 
श्रुत्वेतिहासं नृपते समाश्वसिहि मा शुच:।
व्यसने त्वं महाराज न विषीदितुमर्हसि॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे महाराज! इस कथा को सुनकर आपको धैर्य रखना चाहिए, शोक नहीं करना चाहिए। संकट में पड़ने पर आपको निराश नहीं होना चाहिए। ॥13॥
 
King! On hearing this story, you should be patient, do not grieve, O Maharaj! You should not be dejected when you are in trouble. ॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)