Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.79.12: मनुष्य को जो भी वस्तुएँ प्राप्त होती हैं, वे सदैव अस्थिर और नाशवान होती हैं। ऐसा समझकर, तुम्हें उनके प्राप्त होने या नष्ट होने की चिन्ता नहीं करनी चाहिए॥12॥   |   mahabharat अध्याय 3.79: राजा नलके आख्यानके कीर्तनका महत्त्व, बृहदश्व मुनिका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा द्यूतविद्या और अश्वविद्याका रहस्य बताकर जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 79: राजा नलके आख्यानके कीर्तनका महत्त्व, बृहदश्व मुनिका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा द्यूतविद्या और अश्वविद्याका रहस्य बताकर जाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.79.12 
अस्थिरत्वं च संचिन्त्य पुरुषार्थस्य नित्यदा।
तस्योदये व्यये चापि न चिन्तयितुमर्हसि॥ १२॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य को जो भी वस्तुएँ प्राप्त होती हैं, वे सदैव अस्थिर और नाशवान होती हैं। ऐसा समझकर, तुम्हें उनके प्राप्त होने या नष्ट होने की चिन्ता नहीं करनी चाहिए॥12॥
 
All the objects that a man gets are always unstable and perishable. Thinking this, you should not worry at all about getting them or getting them destroyed.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)