Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.78.27-28: राजन! निषादराज के इस प्रकार सान्त्वना देने पर पुष्कर ने हाथ जोड़कर पुण्यश्लोक नल को प्रणाम किया और इस प्रकार कहा - 'पृथ्वी के स्वामी! चूँकि आप मुझे मेरा जीवन और निवासस्थान लौटा रहे हैं, अतः आपका यश चिरस्थायी रहे। आप सौ वर्ष तक जीवित रहें और सुखी रहें।'॥ 27-28॥ | mahabharat अध्याय 3.78: राजा नलका पुष्करको जूएमें हराना और उसको राजधानीमें भेजकर अपने नगरमें प्रवेश करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सान्त्वितो नैषधेनैवं पुष्कर: प्रत्युवाच तम्।
पुण्यश्लोकं तदा राजन्नभिवाद्य कृताञ्जलि:॥ २७॥
कीर्तिरस्तु तवाक्षय्या जीव वर्षशतं सुखी।
यो मे वितरसि प्राणानधिष्ठानं च पार्थिव॥ २८॥
अनुवाद
राजन! निषादराज के इस प्रकार सान्त्वना देने पर पुष्कर ने हाथ जोड़कर पुण्यश्लोक नल को प्रणाम किया और इस प्रकार कहा - 'पृथ्वी के स्वामी! चूँकि आप मुझे मेरा जीवन और निवासस्थान लौटा रहे हैं, अतः आपका यश चिरस्थायी रहे। आप सौ वर्ष तक जीवित रहें और सुखी रहें।'॥ 27-28॥
King! After Nishadraj consoled him in this manner, Pushkar folded his hands and bowed to Punyashlok Nala and said thus - 'Lord of the Earth! Since you are giving me back my life and place of residence, may your fame remain everlasting. May you live for a hundred years and be happy.'॥ 27-28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥