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mahabharat 3.78.26: इस प्रकार धर्मात्मा राजा नल ने अपने भाई पुष्कर को सांत्वना दी, उसे बार-बार गले लगाया और उसे अपनी राजधानी के लिए विदा किया।   |   mahabharat अध्याय 3.78: राजा नलका पुष्करको जूएमें हराना और उसको राजधानीमें भेजकर अपने नगरमें प्रवेश करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 78: राजा नलका पुष्करको जूएमें हराना और उसको राजधानीमें भेजकर अपने नगरमें प्रवेश करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.78.26 
एवं नल: सान्त्वयित्वा भ्रातरं सत्यविक्रम:।
स्वपुरं प्रेषयामास परिष्वज्य पुन: पुन:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार धर्मात्मा राजा नल ने अपने भाई पुष्कर को सांत्वना दी, उसे बार-बार गले लगाया और उसे अपनी राजधानी के लिए विदा किया।
 
In this manner the virtuous King Nala consoled his brother Pushkara, embraced him again and again and sent him off to his capital.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)