श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 78: राजा नलका पुष्करको जूएमें हराना और उसको राजधानीमें भेजकर अपने नगरमें प्रवेश करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.78.24 
तथैव सर्वसम्भारं स्वमंशं वितरामि ते।
तथैव च मम प्रीतिस्त्वयि वीर न संशय:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
'मैं तुम्हारा सारा सामान और तुम्हारे हिस्से का धन तुम्हें लौटा दूँगा। वीर! इसमें मुझे कोई संदेह नहीं कि मेरा तुम्हारे प्रति प्रेम पहले जैसा ही बना रहेगा।॥ 24॥
 
'I will return all your belongings and your share of the money to you. Veer! I have no doubt that my love for you will remain the same as before.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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