श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 78: राजा नलका पुष्करको जूएमें हराना और उसको राजधानीमें भेजकर अपने नगरमें प्रवेश करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.78.23 
नाहं परकृतं दोषं त्वय्याधास्ये कथंचन।
यथासुखं वै जीव त्वं प्राणानवसृजामि ते॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'मैं किसी भी प्रकार दूसरों (कलियुग) के पापों को तुम्हारे सिर पर नहीं डालूँगा। तुम सुखपूर्वक रहो। मैं तुम्हें तुम्हारा जीवन लौटाता हूँ।॥23॥
 
'I will not in any way put the sins of others (Kaliyuga) on your head. You live happily. I give you back your life.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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