श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 78: राजा नलका पुष्करको जूएमें हराना और उसको राजधानीमें भेजकर अपने नगरमें प्रवेश करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.78.22 
न त्वया तत् कृतं कर्म येनाहं विजित: पुरा।
कलिना तत् कृतं कर्म त्वं च मूढ न बुध्यसे॥ २२॥
 
 
अनुवाद
पहले मैं तुमसे पराजित हुआ था, परन्तु उसमें तुम्हारा कोई प्रयास नहीं था। मूर्ख! वह सब कलियुग का ही काम था, जिसे तुम नहीं जानते॥ 22॥
 
‘Earlier I was defeated by you, but there was no effort on your part. Fool! That was all the handiwork of Kali Yuga, which you do not know.॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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