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mahabharat 3.78.20-21: पुष्कर को पराजित करने के पश्चात राजा नल ने मुस्कुराते हुए उससे कहा- 'हे राजन! अब यह सम्पूर्ण शान्त एवं निर्विघ्न राज्य मेरे अधीन हो गया है। तुम विदर्भ राजकुमारी दमयन्ती की ओर आँख उठाकर भी नहीं देख सकते। मूर्ख! आज से तुम अपने परिवार सहित दमयन्ती के दास हो गये हो।'   |   mahabharat अध्याय 3.78: राजा नलका पुष्करको जूएमें हराना और उसको राजधानीमें भेजकर अपने नगरमें प्रवेश करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 78: राजा नलका पुष्करको जूएमें हराना और उसको राजधानीमें भेजकर अपने नगरमें प्रवेश करना  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  3.78.20-21 
जित्वा च पुष्करं राजा प्रहसन्निदमब्रवीत्।
मम सर्वमिदं राज्यमव्यग्रं हतकण्टकम्॥ २०॥
वैदर्भी न त्वया शक्या राजापसद वीक्षितुम्।
तस्यास्त्वं सपरीवारो मूढ दासत्वमागत:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
पुष्कर को पराजित करने के पश्चात राजा नल ने मुस्कुराते हुए उससे कहा- 'हे राजन! अब यह सम्पूर्ण शान्त एवं निर्विघ्न राज्य मेरे अधीन हो गया है। तुम विदर्भ राजकुमारी दमयन्ती की ओर आँख उठाकर भी नहीं देख सकते। मूर्ख! आज से तुम अपने परिवार सहित दमयन्ती के दास हो गये हो।'
 
After defeating Pushkar, King Nala smilingly said to him- 'O King! Now this entire peaceful and uninterrupted kingdom has come under my control. You cannot even raise your eyes towards Vidarbha princess Damayanti. Fool! From today you along with your family have become Damayanti's slave.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)