Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.78.16-17: पुष्कर की ये असंगत बातें सुनकर राजा नल को बड़ा क्रोध आया । वे तलवार से उसका सिर काट डालना चाहते थे । क्रोध से उनकी आँखें लाल हो गईं, फिर भी राजा नल ने मुस्कराते हुए उससे कहा - ॥16-17॥ | mahabharat अध्याय 3.78: राजा नलका पुष्करको जूएमें हराना और उसको राजधानीमें भेजकर अपने नगरमें प्रवेश करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रुत्वा तु तस्य वा वाचो बह्वबद्धप्रलापिन:॥ १६॥
इयेष स शिरश्छेत्तुं खड्गेन कुपितो नल:।
स्मयंस्तु रोषताम्राक्षस्तमुवाच नलो नृप:॥ १७॥
अनुवाद
पुष्कर की ये असंगत बातें सुनकर राजा नल को बड़ा क्रोध आया । वे तलवार से उसका सिर काट डालना चाहते थे । क्रोध से उनकी आँखें लाल हो गईं, फिर भी राजा नल ने मुस्कराते हुए उससे कहा - ॥16-17॥
Hearing these incoherent talks of Pushkar, King Nala became very angry. He wanted to cut off his head with his sword. His eyes became red with anger, but still King Nala said to him smilingly -॥16-17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥