श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 78: राजा नलका पुष्करको जूएमें हराना और उसको राजधानीमें भेजकर अपने नगरमें प्रवेश करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.78.11 
नैषधेनैवमुक्तस्तु पुष्कर: प्रहसन्निव।
ध्रुवमात्मजयं मत्वा प्रत्याह पृथिवीपतिम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जब निषधराज नल ने ऐसा कहा, तब पुष्कर ने अपनी विजय अवश्यम्भावी समझकर उनसे हँसकर कहा -॥11॥
 
When Nal, the king of Nishad, said thus, Pushkara, assuming his victory to be inevitable, smilingly said to him -॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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