vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 78: राजा नलका पुष्करको जूएमें हराना और उसको राजधानीमें भेजकर अपने नगरमें प्रवेश करना
»
श्लोक 11
श्लोक
3.78.11
नैषधेनैवमुक्तस्तु पुष्कर: प्रहसन्निव।
ध्रुवमात्मजयं मत्वा प्रत्याह पृथिवीपतिम्॥ ११॥
अनुवाद
जब निषधराज नल ने ऐसा कहा, तब पुष्कर ने अपनी विजय अवश्यम्भावी समझकर उनसे हँसकर कहा -॥11॥
When Nal, the king of Nishad, said thus, Pushkara, assuming his victory to be inevitable, smilingly said to him -॥ 11॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas