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श्लोक 3.78.10  |
द्वयोरेकतरे बुद्धि: क्रियतामद्य पुष्कर।
कैतवेनाक्षवत्यां तु युद्धे वा नाम्यतां धनु:॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| पुष्कर ! आज तुम दोनों में से किसी एक पर ध्यान दो। या तो कपटपूर्वक जुआ खेलो, या युद्ध के लिए धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाओ।॥10॥ |
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| ‘Pushkar! Today you should concentrate on one of the two. Either play gambling fraudulently or string the bow for war.’॥10॥ |
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