श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 78: राजा नलका पुष्करको जूएमें हराना और उसको राजधानीमें भेजकर अपने नगरमें प्रवेश करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.78.1 
बृहदश्व उवाच
स मासमुष्य कौन्तेय भीममामन्त्र्य नैषध:।
पुरादल्पपरीवारो जगाम निषधान् प्रति॥ १॥
 
 
अनुवाद
बृहदश्व मुनि कहते हैं- युधिष्ठिर! निषधनरेश एक मास तक कुण्डिनपुर में रहकर राजा भीम से अनुमति लेकर कुछ सेवकों के साथ वहाँ से निषधदेश की ओर चल पड़े॥1॥
 
Brihadashva Muni says- Yudhishthir! Nishadhanresh stayed in Kundinpur for a month and took permission from King Bhima and proceeded towards Nishaddesh from there along with a few servants. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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