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mahabharat 3.77.3-4h: राजा भीम ने बड़ी प्रसन्नता से नल को अपना पुत्र स्वीकार किया और नल तथा पतिव्रता स्त्री दमयन्ती का यथोचित आदर-सत्कार किया तथा उन्हें आश्वासन दिया ॥3 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.77: नलके प्रकट होनेपर विदर्भनगरमें महान् उत्सवका आयोजन, ऋतुपर्णके साथ नलका वार्तालाप और ऋतुपर्णका नलसे अश्वविद्या सीखकर अयोध्या जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 77: नलके प्रकट होनेपर विदर्भनगरमें महान् उत्सवका आयोजन, ऋतुपर्णके साथ नलका वार्तालाप और ऋतुपर्णका नलसे अश्वविद्या सीखकर अयोध्या जाना  »  श्लोक 3-4h
 
 
श्लोक  3.77.3-4h 
तं भीम: प्रतिजग्राह पुत्रवत् परया मुदा।
यथार्हं पूजयित्वा च समाश्वासयत प्रभु:॥ ३॥
नलेन सहितां तत्र दमयन्तीं पतिव्रताम्।
 
 
अनुवाद
राजा भीम ने बड़ी प्रसन्नता से नल को अपना पुत्र स्वीकार किया और नल तथा पतिव्रता स्त्री दमयन्ती का यथोचित आदर-सत्कार किया तथा उन्हें आश्वासन दिया ॥3 1/2॥
 
King Bhima very happily accepted Nala as his son and treated Nala and the devoted wife Damayanti with due respect and assured them. ॥ 3 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)