श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 77: नलके प्रकट होनेपर विदर्भनगरमें महान् उत्सवका आयोजन, ऋतुपर्णके साथ नलका वार्तालाप और ऋतुपर्णका नलसे अश्वविद्या सीखकर अयोध्या जाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.77.20 
ऋतुपर्णे गते राजन्नलो राजा विशाम्पते।
नगरे कुण्डिने कालं नातिदीर्घमिवावसत्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
राजा! ऋतुपर्ण के चले जाने के बाद राजा नल कुछ समय तक कुण्डिनपुर में रहे। उन्हें वह समय बहुत कम लगा।
 
King! After Rituparna left, King Nala stayed in Kundinpur for some time. That period seemed like a short time to him.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि नलोपाख्यानपर्वणि ऋतुपर्णस्वदेशगमने सप्तसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत नलोपाख्यानपर्वमें ऋतुपर्णका स्वदेशगमनविषयक सतहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७७॥

 
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