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mahabharat 3.77.18-19: युधिष्ठिर! ऋतुपर्ण ने भी शास्त्रानुसार उनसे घुड़सवारी सीखी। घोड़ों का रहस्य जानकर और निषधन के राजा नल को जुए का रहस्य समझाकर, राजा ऋतुपर्ण एक अन्य सारथी को साथ लेकर अपने नगर को लौट गए।   |   mahabharat अध्याय 3.77: नलके प्रकट होनेपर विदर्भनगरमें महान् उत्सवका आयोजन, ऋतुपर्णके साथ नलका वार्तालाप और ऋतुपर्णका नलसे अश्वविद्या सीखकर अयोध्या जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 77: नलके प्रकट होनेपर विदर्भनगरमें महान् उत्सवका आयोजन, ऋतुपर्णके साथ नलका वार्तालाप और ऋतुपर्णका नलसे अश्वविद्या सीखकर अयोध्या जाना  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  3.77.18-19 
स च तां प्रतिजग्राह विधिदृष्टेन कर्मणा।
गृहीत्वा चाश्वहृदयं राजन् भाङ्गासुरिर्नृप:॥ १८॥
निषधाधिपतेश्चापि दत्त्वाक्षहृदयं नृप:।
सूतमन्यमुपादाय ययौ स्वपुरमेव ह॥ १९॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! ऋतुपर्ण ने भी शास्त्रानुसार उनसे घुड़सवारी सीखी। घोड़ों का रहस्य जानकर और निषधन के राजा नल को जुए का रहस्य समझाकर, राजा ऋतुपर्ण एक अन्य सारथी को साथ लेकर अपने नगर को लौट गए।
 
Yudhishthira! Rituparna also learnt horsemanship from him according to the scriptures. After learning the secret of horses and explaining the secret of gambling to the king of Nishadhan Nala, king Rituparna went back to his city taking another charioteer with him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)