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श्लोक 3.77.15  |
पूर्वं ह्यपि सखा मेऽसि सम्बन्धी च जनाधिप।
अत ऊर्ध्वं तु भूयस्त्वं प्रीतिमाहर्तुमर्हसि॥ १५॥ |
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| अनुवाद |
| हे ज्ञानेश्वर! आप पहले भी मेरे मित्र और सम्बन्धी थे और इसके बाद भी आपको मुझ पर अधिकाधिक प्रेम रखना चाहिए॥ 15॥ |
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| O Jnaneshwar! You were my friend and relative even before and even after this you should have maximum love for me.॥ 15॥ |
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