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श्लोक 3.77.13  |
यदि वाबुद्धिपूर्वाणि यदि बुद्धॺापि कानिचित्।
मया कृतान्यकार्याणि तानि त्वं क्षन्तुमर्हसि॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| 'यदि उन दिनों में मैंने जाने-अनजाने में आपके साथ कोई दुर्व्यवहार किया हो तो कृपया मुझे क्षमा करें।' |
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| ‘If I have misbehaved with you knowingly or unknowingly during those days, please forgive me.’ |
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