श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 77: नलके प्रकट होनेपर विदर्भनगरमें महान् उत्सवका आयोजन, ऋतुपर्णके साथ नलका वार्तालाप और ऋतुपर्णका नलसे अश्वविद्या सीखकर अयोध्या जाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.77.13 
यदि वाबुद्धिपूर्वाणि यदि बुद्धॺापि कानिचित्।
मया कृतान्यकार्याणि तानि त्वं क्षन्तुमर्हसि॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'यदि उन दिनों में मैंने जाने-अनजाने में आपके साथ कोई दुर्व्यवहार किया हो तो कृपया मुझे क्षमा करें।'
 
‘If I have misbehaved with you knowingly or unknowingly during those days, please forgive me.’
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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