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mahabharat 3.77.11: ‘निषधननरेश! यह बड़े सौभाग्य की बात है कि तुम्हें अपनी खोई हुई पत्नी मिल गई।’ ऐसा कहकर उन्होंने नल को नमस्कार किया।   |   mahabharat अध्याय 3.77: नलके प्रकट होनेपर विदर्भनगरमें महान् उत्सवका आयोजन, ऋतुपर्णके साथ नलका वार्तालाप और ऋतुपर्णका नलसे अश्वविद्या सीखकर अयोध्या जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 77: नलके प्रकट होनेपर विदर्भनगरमें महान् उत्सवका आयोजन, ऋतुपर्णके साथ नलका वार्तालाप और ऋतुपर्णका नलसे अश्वविद्या सीखकर अयोध्या जाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.77.11 
दिष्टॺा समेतो दारै: स्वैर्भवानित्यभ्यनन्दत॥ ११॥
 
 
अनुवाद
‘निषधननरेश! यह बड़े सौभाग्य की बात है कि तुम्हें अपनी खोई हुई पत्नी मिल गई।’ ऐसा कहकर उन्होंने नल को नमस्कार किया।
 
'Nishadhanaresh! It is a matter of great fortune that you have met your lost wife.' Saying this he greeted Nala.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)